मुकदमों और कर्जों से मुक्ति के लिए हिस्ट्रीशीटर ने साथी की हत्या कर मिटा दी अपनी पहचान 

मुकदमों और कर्जों से मुक्ति के लिए हिस्ट्रीशीटर ने साथी की हत्या कर मिटा दी अपनी पहचान 

■मुकदमों और कर्जों से मुक्ति के लिए हिस्ट्रीशीटर ने साथी की हत्या कर मिटा दी अपनी पहचान                      

■सीएचसी सितारगंज के कर्मचारी की मिलीभगत से शव के साथ रख दी अपनी आईडी                              

■जांच में खुलासा होने पर सितारगंज कोतवाली में आरोपी और उसके परिजनों पर मुकदमा दर्ज                  

■नारायण सिंह रावत

■सितारगंज। मुरादाबाद के रहने वाले एक हिस्ट्रीशीटर ने कई कंपनियों से लिए कर्ज और बीमा की धनराशि हड़पने के लिए गजब की साजिश रची। उसने अपनी पहचान मिटाने के लिए साथी की हत्या कर दी और उसके शव के साथ अपनी आईडी रख दी। उसने इतनी बेरहमी से हत्या की थी की परिवार के लोग भी अपने बेटे की लाश पहचान नहीं पाए और उसकी शिनाख्त कर ली। जांच में खुलासा होने के बाद सितारगंज में आरोपी और उसके परिवार के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल शाहजहांपुर के रोजा थाने की पुलिस ने 25 सितंबर 2022 को मुनेश यादव पुत्र भीकम सिंह निवासी आदर्श कॉलोनी शाहजहांपुर को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान मुनेश के कब्जे से 29 अगस्त 2015 का मुकेश यादव पुत्र भीकम सिंह की मौत से संबंधित पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस ने बरामद की। पूछताछ के दौरान मुनेश ने बताया की उसका असली नाम मुकेश यादव पुत्र भीकम सिंह यादव निवासी हसनगंज मजरा बेलवारी थाना मुंडा पांडे जिला मुरादाबाद है। मुकेश यादव के खिलाफ लूट डकैती और गैंगस्टर से संबंधित कई मुकदमे यूपी में दर्ज हैं। इसके अलावा उसके ऊपर सिक्योरिटी और बीमा कंपनियों का कर्ज था। मुकदमे में सजा से बचने और कर्ज से मुक्ति के लिए उसने अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मिलकर अपनी ही मौत का नाटक रचा। उसने सितारगंज में अपने साथी मनिन्दर की पहले हत्या कर दी इसके बाद सबको अपनी पहचान देने के लिए सितारगंज सीएचसी के कर्मचारी ज्वाला प्रसाद से साठगांठ कर ली। उसने ज्वाला प्रसाद को 30000 देकर लाश के साथ मुकेश यादव निवासी पीतलनगरी पोस्ट कटघर जिला मुरादाबाद की आईडी रख दी।            

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मुकेश के परिजनों ने की थी शव की शिनाख्त                               

जुलाई 2015 में पुलिस ने मुकेश यादव के परिजनों को उसकी मौत की सूचना दी थी। इसके बाद उसके परिजन सितारगंज सीएससी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। लाश को इतनी बेरहमी से कुचला गया था कि उसकी पहचान मुश्किल थी। लाश से मुकेश यादव की आईडी बरामद हुई थी इस कारण परिजनों ने भी उसकी पहचान मुकेश यादव के तौर पर कर ली। यहां गौर करने वाली बात यह है कि मुकेश और मनिन्दर दोनों की कद काठी एक जैसी थी। लाश की पहचान करने में मृतक मुकेश का पिता भीकम सिंह, ममेरा भाई रामगुलाम, चचेरा भाई डम्बर सिंह और लाल सिंह निवासी हसनगंज बेलवाड़ी मूंढापांडे मुरादाबाद और पप्पू निवासी लालपुर पट्टी पटवाई रामपुर शामिल थे।                    

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पुलिस ने लिए कई गवाहों के बयान                 

शाहजहांपुर में मुकेश यादव के पकड़े जाने के बाद वहां की पुलिस ने उधम सिंह नगर जिले को मामले की सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस में जांच की और कई गवाहों के बयान दर्ज किए। गवाह चन्द्रपाल ने पुलिस को बताया था कि मुकेश और मनिन्दर की कद काठी काफी मिलती थी। मंनिन्दर के भाई मोनू ने बताया कि उसका भाई 2016 से ही गुमशुदा है।            

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मंनिन्दर की गुमशुदगी तक नहीं हुई थी दर्ज                                             

मंनिदर की हत्या 2015 में जुलाई में हुई थी। हत्या वाले दिन मंनिन्दर और मुकेश को साथ में देखा गया था। इसके बाद उसका पता नहीं चला। मंनिन्दर के भाई मोनू ने पुलिस को बताया कि 2016 में उसने पुलिस को भाई की गुमशुदगी की तहरीर दी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।    

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इनके खिलाफ दर्ज की गई रिपोर्ट       

सितारगंज पुलिस ने मंनिन्दर की हत्या में मुकेश यादव, उसके पिता भीकम सिंह, बहनोई धर्मपाल, पप्पू, सुधा और संगीता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

Narayan singh Rawat

Chief Editor 9917435143

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