यहां भोले के भक्तों का अंदाज निराला, करते हैं कांटों पर अठखेलियां,हर साल चैत्र माह में पालन करते हैं कठिन सन्यासी व्रत

●यहां भोले के भक्तों का अंदाज निराला, करते हैं कांटों पर अठखेलियां
●हर साल चैत्र माह में पालन करते हैं कठिन सन्यासी व्रत

■नारायण सिंह रावत
■सितारगंज। शिव भक्त ख़ासकर बंगाली समुदाय के लोग पूरे चैत्र मास में कठिन सन्यास व्रत रख कठिन साधना करते हैं। शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए चैत्र मास के अंतिम दिनों में कांटा झाप अनुष्ठान के तहत नंगे पैर कांटों पर चलते व लोटपोट होते हैं। माह के अंतिम दिन चड़क पूजा में पीठ में लोहे के बड़े बड़े कांटे चुभोकर ऊँचे चरखे के सहारे हवा में कलाबाज़ियाँ खाते है। बाबा तारक नाथ के जयकारे लगाते हुए साधना पूरी करते हैं।
चैत्र मास शुरू होते ही शिव भक्त कठिन साधना सुरु कर देते हैं। वह एक माह तक सन्यास व्रत धारण कर लेते हैं। दर दर भिक्षा में मिले अन्न से दिन में एक समय सात्विक भोजन कर ब्रह्मचर्य का पालन भी करते है। करीब एक माह तक चलने वाली कठिन साधना चैत्र मास के अंतिम दिन पूरी होती है। इसी के साथ शक्तिफार्म के सुरेंद्रनगर व वैकुंठपुर स्थित बाबा तारक नाथ धाम में पांच दिवसीय मेला लगता है। इसी क्रम में इस वर्ष बृहस्पतिवार को कांटा झाप और शनिवार को चड़क पूजा का आयोजन किया गया। व्रत धारी सन्यासियों ने सात प्रकार के कांटों पर चलकर और लोटपोट होकर भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति का प्रदर्शन किया। इस दौरान भोले बाबा पार करेगा, बम बम तारक बम जैसे उद्घोष से माहौल शिव मय हो गया। इस दौरान किसी भी शिव भक्त को खरोंच तक नहीं आई।

कांटा झाप देखने के लिए हजारों की संख्या में शिव भक्त जूट रहे। चड़क पूजा के दौरान मंदिर परिसर के बीचोंबीच लगे 25 फीट ऊंचे खंभे में बने लकड़ी के चरखे पर सन्यासियों ने अपनी पीठ की चमड़ी में लोहे के चुभोकर रस्सी के सहारे हवा में झूलते हुए अनेकों करतब दिखाए। वहाँ उपस्थित हजारों लोग इन करतबों को देख अचंभित हुए बिना नहीं रह सके। इसके अतिरिक्त कई सन्यासियों ने अपनी जीभ, होंठ, जांघ और पेट में लोहे की छड़ भेदकर शिव के प्रति अपनी अगाध आस्था व्यक्त किया। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी इन हैरतअंगेज करतबों के गवाह बने।
इनसेट
10अप्रैल से शरू हुआ मेला
शक्तिफार्म के सुरेंद्रनगर में बाबा तारकनाथ धाम में 10 अप्रैल से धार्मिक कार्यक्रम आरंभ हो गए हैं। 10 अप्रैल को महाअविश्य एवं रात्रि जात्रा मेला उद्घाटन हुआ। 11 अप्रैल को कॉटा झाप एवं रात्र जात्रा अनुष्ठान चला, 12 अप्रैल को झांकी लीलावतीर विवाह एवं रात्रि वाऊल संगीत, 13 अप्रैल को छातुभोग, चड़क पूजा एवं रात्रि जात्रा अनुष्ठान का आयोजन किया गया। 14 अप्रैल को महाभण्डारा व रात्रि जात्रा का अनुष्ठान के साथ महोत्सव का समापन हुआ।








