साइबर ठगों की पूरी चेन पर STF का बड़ा प्रहार, 820 खातों की जांच में 159 मुकदमे

■ साइबर ठगों की पूरी चेन पर STF का बड़ा प्रहार, 820 खातों की जांच में 159 मुकदमे
■ 1236 एटीएम निकासी मामलों का सत्यापन, 644 सिम और 630 आईएमईआई ब्लॉक; 10 साइबर अपराधी गिरफ्तार

✍🏻 नारायण सिंह रावत
देहरादून। साइबर ठगी करने वालों के साथ ही ठगी की रकम खपाने, निकालने और अपराध में इस्तेमाल संसाधन उपलब्ध कराने वालों पर उत्तराखंड पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर STF, साइबर क्राइम यूनिट, जिला साइबर सेल और जनपद पुलिस ने सात दिवसीय ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ चलाकर साइबर अपराध की पूरी चेन को खंगाला। अभियान में 820 संदिग्ध बैंक खातों का सत्यापन कर 159 मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, 1236 एटीएम निकासी मामलों/स्थानों के सत्यापन में 32 और 84 चेक निकासी स्थानों की जांच में 37 मुकदमे दर्ज किए गए।


अभियान के दौरान 644 संदिग्ध सिम और 630 आईएमईआई ब्लॉक किए गए। 442 संदिग्ध मामलों का सत्यापन करते हुए 10 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की कार्रवाई का दायरा सिर्फ ठगी करने वालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने, ठगी की रकम निकालने और साइबर अपराधियों को सिम समेत अन्य संसाधन मुहैया कराने वाले लोगों तक भी पहुंचा।
एक माह तक तैयार किया डाटा, फिर हॉटस्पॉट पर कसा शिकंजा
पुलिस ने एक से 31 जुलाई तक चले साइबर सुरक्षा अभियान में संदिग्ध मोबाइल नंबर, सिम, आईएमईआई, म्यूल बैंक खाते, एटीएम और चेक निकासी स्थानों समेत डिजिटल व वित्तीय संकेतकों का तकनीकी विश्लेषण किया। I4C, दूरसंचार विभाग और RBI से मिली सूचनाओं को आपस में जोड़कर संदिग्ध नेटवर्क की पहचान की गई। इसके बाद 24 अगस्त से एक सितंबर तक चिन्हित साइबर हॉटस्पॉट पर धरपकड़ और सत्यापन अभियान चलाया गया।
हरिद्वार में ‘नवादा ग्रुप’ का पर्दाफाश, 200 से अधिक खाते सामने आए
ऑपरेशन हॉटस्पॉट के दौरान हरिद्वार के श्यामपुर थाना पुलिस ने संगठित साइबर ठगी नेटवर्क ‘नवादा ग्रुप’ का पर्दाफाश कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक बैंक खाते सामने आए। आरोपियों के कब्जे से 45 से अधिक एटीएम कार्ड, 20 बैंक पासबुक, दो लैपटॉप और 17 मोबाइल फोन बरामद किए गए।
पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम पहले म्यूल खातों में पहुंचाई जाती थी। इसके बाद एटीएम से नकदी निकालने और सीडीएम के माध्यम से रकम दूसरे खातों में जमा या ट्रांसफर कर मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश की जाती थी।
पांच फीसदी कमीशन लेकर निकालते थे ठगी की रकम
हरिद्वार के पथरी क्षेत्र में एटीएम निकासी के डाटा के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम उनके खातों में पहुंचती थी और आरोपी पांच फीसदी कमीशन लेकर एटीएम से नकदी निकालते थे। पुलिस अब ऐसे अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है, जो ठगी की रकम को निकालने या आगे पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।
कोटद्वार में 3.86 लाख की ठगी का आरोपी गिरफ्तार
कोटद्वार में फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर 3.86 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने आरोपी आशीष रिचर्ड को गिरफ्तार किया। जांच में उसके आठ बैंक खातों में करीब 1.50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की रकम पहुंचने की जानकारी सामने आई। इनमें से करीब सात लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं। साइबर पोर्टल पर आरोपी के खिलाफ विभिन्न राज्यों से 19 शिकायतें भी दर्ज मिली हैं।
240 संदिग्धों की मैपिंग से मिलीं 100 से अधिक अंतरराज्यीय कड़ियां
उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधियों और संदिग्धों का विवरण I4C के Samanvaya Portal पर अपलोड किया। दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर अपराध मामलों से मैपिंग के दौरान 100 से अधिक अंतरराज्यीय कड़ियां सामने आईं। संबंधित राज्यों से समन्वय कर आरोपियों के सत्यापन, आपराधिक इतिहास की जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
1930 पर आईं 18,749 शिकायतें, 23.44 करोड़ रुपये बचाए
वर्ष 2026 में 1930/NCRP पर प्राप्त 18,749 साइबर अपराध शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से करीब 23.44 करोड़ रुपये की ठगी की रकम होल्ड/सेव कराई। वहीं, 683 ई-जीरो FIR में से 659 को नियमित FIR में परिवर्तित या लिंक किया गया।
चार जिलों में दो हजार पुलिसकर्मी मैदान में
तीन सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल के चिन्हित साइबर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया गया। STF की तकनीकी टीम के साथ करीब दो हजार पुलिसकर्मी कार्रवाई में लगाए गए। अभियान के दौरान 300 से अधिक संदिग्धों को निरुद्ध कर पूछताछ की जा रही है। संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और सिम की जांच के साथ साक्ष्यों के आधार पर नोटिस, मुकदमा दर्ज करने और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
ठगी करने वालों के साथ मददगार भी होंगे कार्रवाई के दायरे में
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देश पर साइबर अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। तकनीकी डाटा, PRATIBIMB और NCRP समेत अन्य माध्यमों से संदिग्ध हॉटस्पॉट और साइबर नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का साफ फोकस है कि साइबर ठगी करने वाले ही नहीं, बल्कि उनके लिए खाते, सिम, एटीएम और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने वाले सहयोगियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।



