उपपा का सरकार पर हमला, कहा- लोकतंत्र खत्म करने की कोशिश, जनता को देंगे मजबूत विकल्प

■उपपा का सरकार पर हमला, कहा- लोकतंत्र खत्म करने की कोशिश, जनता को देंगे मजबूत विकल्प
■जनसभा में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन और भू-कानून के मुद्दे उठाए; आईएमपीसीएल के निजीकरण का जताया विरोध

■सितारगंज, संवाददाता। उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने सोमवार को नगर के मुख्य चौक पर जनसभा आयोजित कर केंद्र और प्रदेश सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि राज्य गठन के ढाई दशक बाद भी उत्तराखंड के गठन की मूल अवधारणा पूरी नहीं हो सकी है। प्राकृतिक एवं आर्थिक संसाधनों का कथित दोहन जारी है, जबकि पहाड़ से लेकर तराई तक युवा रोजगार की तलाश में पलायन को मजबूर हैं।
पत्रकार वार्ता में उपपा के राष्ट्रीय समन्वयक संयोजक पीसी तिवारी और केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने कहा कि न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के उद्देश्य से पार्टी प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर व्यापक जनसंवाद कार्यक्रम चला रही है। आगामी विधानसभा चुनाव में उपपा संघर्षशील और ईमानदार ताकतों को एकजुट कर जनता के सामने मजबूत राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करेगी।
★मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप
उपपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन, खेती-किसानी और श्रमिकों के शोषण जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस काम करने के बजाय जनता का ध्यान कथित तौर पर नफरत और विभाजन की राजनीति की ओर मोड़ रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलनों से साफ है कि जनता अब अपने रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब चाहती है।
★आईएमपीसीएल के निजीकरण का विरोध
पार्टी पदाधिकारियों ने मुनाफे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईएमपीसीएल को निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध किया। उन्होंने इसे राज्य के हितों के खिलाफ बताया और कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में देने की नीति पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
★भू-कानून और रोजगार को लेकर सरकार को घेरा
उपपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता लंबे समय से सख्त भू-कानून और ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठा रही है। इसके बावजूद रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसाधनों का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय उनकी बंदरबांट हो रही है।
★अंकिता और केतन हत्याकांड का उठाया मुद्दा
नेताओं ने अंकिता भंडारी और केतन हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में वास्तविक सूत्रधारों के सामने नहीं आने से जनता के मन में सवाल बने हुए हैं। उन्होंने क्षेत्रीय दलों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एक प्रमुख क्षेत्रीय दल के सत्ताधारी दल के साथ खड़े होने से जनता का भरोसा कमजोर हुआ है।
उपपा नेताओं ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य प्रदेश के संघर्षशील, ईमानदार और जनपक्षीय लोगों को एक मंच पर लाकर उत्तराखंड को नई राजनीतिक दिशा देना है।
इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जीवन चंद्र उप्रेती, नरेश नौडियाल, किरन आर्या, लालमणि, ललिता रावत, दिनेश उपाध्याय, कौशल्या, आशिफ, गिरीश आर्य समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।



