स्कूल और तिरंगा चौक के बीच शराब की दुकान पर फूटा गुस्सा

■स्कूल और तिरंगा चौक के बीच शराब की दुकान पर फूटा गुस्सा
■मानकों के विपरीत संचालन का आरोप, राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा प्रभावित होने की बात; धरने में पुलिस-प्रशासन से तीखी नोकझोंक

【नारायण सिंह रावत】
■सितारगंज। मुख्य तिरंगा चौक स्थित अंग्रेजी और देसी शराब की दुकान को हटाने की मांग को लेकर शनिवार को क्षेत्रवासियों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। दुकान के बाहर धरने पर बैठे लोगों ने आरोप लगाया कि स्कूल, अस्पताल और तिरंगा चौक के बीच संचालित शराब की दुकान आबकारी मानकों के विपरीत है। उनका कहना था कि दुकान के कारण बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा भी प्रभावित हो रही है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस-प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में तहसीलदार हिमांशु जोशी को ज्ञापन सौंपने और नियमानुसार कार्रवाई के आश्वासन पर धरना समाप्त कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि करीब एक माह पूर्व भी उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर शराब की दुकानों को आबादी से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। उस समय सात दिन में कार्रवाई का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे नाराज होकर क्षेत्रवासियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।
आंदोलनकारियों का आरोप था कि शराब की दुकान मुख्य बाजार, स्कूल और अस्पताल के निकट संचालित होने से महिलाओं, छात्र-छात्राओं, मरीजों और व्यापारियों को परेशानी होती है। उनका यह भी कहना था कि तिरंगा चौक जैसे सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज के समीप शराब की दुकान होना अनुचित है और इससे राष्ट्रीय सम्मान की भावना प्रभावित होती है। उन्होंने दुकान को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की।
धरने की सूचना पर तहसीलदार हिमांशु जोशी, कोतवाल सुंदरम शर्मा, आबकारी निरीक्षक ब्रजेश जोशी सहित पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ देर तक तीखी बहस हुई। बाद में तहसीलदार ने ज्ञापन प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



