बांग्ला भाषा और संस्कृति विश्व की अमूल्य धरोहर : विजय बहुगुणा

■बांग्ला भाषा और संस्कृति विश्व की अमूल्य धरोहर : विजय बहुगुणा
■बंगाली बहुल क्षेत्रों के विद्यालयों में बांग्ला भाषा लागू कराने का भरोसा, बोले- संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होते ही होगा क्रियान्वयन

■सितारगंज। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि बांग्ला भाषा और संस्कृति केवल एक समाज की पहचान नहीं, बल्कि विश्व की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। साहित्य, संगीत, कला, शिक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में बंगाली समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
‘बांग्ला भाषा अभियान’ के तहत घर-घर जाकर बांग्ला भाषा की पुस्तकें वितरित करने वाले श्रीमद्भागवत कथा व्यास आचार्य रामचन्द्र राय को सम्मानित करते हुए बहुगुणा ने कहा कि बंगाली बहुल क्षेत्रों के विद्यालयों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई शुरू कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना को लागू करने में कुछ संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं बाधा बनी हुई हैं, लेकिन आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही इसे धरातल पर उतारा जाएगा।
उन्होंने कहा कि बंगाली समाज के साथ उनका रिश्ता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों पुराना आत्मीय और पारिवारिक संबंध है। समाज ने हर दौर में उन्हें स्नेह, विश्वास और सहयोग दिया है। बंगाली समाज की भाषा, संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन और सादगी भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयां प्रदान करती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी लंबे समय से इच्छा रही है कि शक्तिफार्म को उसकी सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप ‘मिनी कोलकाता’ के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रभावी पहल करेंगे। इससे क्षेत्र में बांग्ला भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
बहुगुणा ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। यदि भाषा सुरक्षित रहेगी तो संस्कृति और परंपराएं भी सुरक्षित रहेंगी। इसलिए बांग्ला भाषा के संरक्षण और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए समाज और सरकार को मिलकर प्रयास करने होंगे।





