सात समंदर पार गूंजा पहाड़, लंदन में 400 से ज्यादा लोगों ने मनाया उत्तराखंड का कौतिक

■सात समंदर पार गूंजा पहाड़, लंदन में 400 से ज्यादा लोगों ने मनाया उत्तराखंड का कौतिक
■फौजी ललित मोहन जोशी, प्रियंका मेहर और सौरभ मित्तानी की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, मुख्यमंत्री धामी का वीडियो संदेश बना आकर्षण
【नारायण सिंह रावत】
■उत्तराखंड। पहाड़ों से हजारों किलोमीटर दूर लंदन में सोमवार को उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और संगीत जीवंत हो उठा। उत्तराखंड कौतिक-2026 में फौजी ललित मोहन जोशी, प्रियंका मेहर और सौरभ मित्तानी ने कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी गीतों की प्रस्तुतियों से 400 से अधिक दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, भाषा और पहाड़ की यादों से दोबारा जुड़ने का अवसर बन गया।

कार्यक्रम का आयोजन दीपक धामी ने किया, जबकि एनडी कलेक्टिव के मैनेजिंग डायरेक्टर निशाद सिंह कन्याल और फाउंडर एवं क्रिएटिव डायरेक्टर दीक्षा राठौर ने इसकी मेजबानी की। कार्यक्रम में उत्तराखंड के लोकसंगीत की पारंपरिक विरासत से लेकर आधुनिक संगीत का रंग देखने को मिला।
दो दशक से संगीत साधना कर रहे फौजी ललित मोहन जोशी ने अपनी प्रस्तुतियों से पहाड़ी लोकधुनों की मिठास बिखेरी। भारतीय सेना में सेवा के साथ संगीत के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे जोशी ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंचों तक पहुंचाने में योगदान दिया है।
प्रियंका मेहर की प्रस्तुति पर युवा भी झूमे। उत्तराखंड की समकालीन संगीत की चर्चित आवाज प्रियंका मेहर ने पारंपरिक कुमाऊंनी और गढ़वाली धुनों को आधुनिक अंदाज में पेश किया। उनकी प्रस्तुति ने खासकर युवा दर्शकों को अपनी भाषा और पहाड़ी संस्कृति से जोड़ने का काम किया।
वहीं सौरभ मित्तानी ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। उनकी प्रस्तुति में उत्तराखंड के नए दौर के संगीत की झलक देखने को मिली। तीनों कलाकारों ने मिलकर उत्तराखंड के संगीत की अलग-अलग पीढ़ियों और शैलियों को एक ही मंच पर सामने रखा।
★धामी के संदेश पर गूंजा तालियों का शोर
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशेष वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड कौतिक-2026 के आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए विदेशों में रह रहे उत्तराखंडियों की ओर से अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहचान को सहेजने के प्रयासों की सराहना की। हजारों मील दूर रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों के बीच मुख्यमंत्री का संदेश भावनात्मक क्षण बन गया और दर्शकों ने तालियों के साथ इसका स्वागत किया।
आयोजक दीक्षा राठौर ने कहा कि लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में उत्तराखंड के संगीत को इतने बड़े स्तर पर प्रस्तुत करना गर्व का क्षण है। पहाड़ों में पले-बढ़े लोगों के लिए संगीत अपनी जड़ों से जुड़ने का मजबूत माध्यम है। दर्शकों को कलाकारों के साथ गाते और झूमते देखना इस बात का प्रमाण है कि संस्कृति की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।
कार्यक्रम में 400 से अधिक लोगों की मौजूदगी रही। पारंपरिक लोकगीतों और आधुनिक प्रस्तुतियों के बीच दर्शकों ने जमकर उत्साह दिखाया। आयोजन ने उत्तराखंड की लोकभाषा, संगीत और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान देने के साथ विदेशों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश भी दिया।




